Wednesday, August 1, 2018

मध्य पाषाण काल - भारत का इतिहास पाषाण काल

  1. मध्य पाषाण काल का समय 9000 ईसा पूर्व से लेकर 4000 ईसा पूर्व तक माना जाता है। 
  2. छोटे उपकरण की खोज होने के कारण इसे मैक्रोलिथिक  काल भी काहा जाता है। 
  3. इस काल के उपकरण अर्धचन्द्राकार, चतुर्भुज, त्रिभुज, गोलाकार आदि के होते थे। 
  4. इस काल में पधुपालन की शुरुआत हुइ। इसका प्रथम साक्ष्य राजस्थान के बागोर नामक स्थान  से प्राप्त हुए। 
  5. इसका दूसरा साक्ष्य मध्य  प्रदेश के आदमगढ़ से प्राप्त हुए है। 
  6. इस काल के मानव ने धनुष बाण का प्रयोग शुरू कर दिया था। 
  7. गुजरात के लंघनाज से छोटे उपकरण, पशुओं की हड्डियां, कब्रिस्तान, 14 मानव कंकाल और कुछ मिटटी के बर्तन प्राप्त हुए है। 
  8. भोजन पाकने की कला की शुरुआत इस काल  में हुई। 
प्रमुख मध्य पाषाणिक बस्तियां
  1. सरायनाहरराय
  2. बागोर
  3. लंघनाज
  4. भीमबेटका 
  5. लेखहिया
  6. महदहा  



Saturday, July 28, 2018

समझदार बकरी

दोस्तों, बहुत समय पहले की बात है। एक घने जंगल में एक बकरी रहती थी। उसके चार बच्चे थे। एक का नाम चेउ दूसरे का नाम मेउ तीसरे का अल्लो और चौथे का नाम बल्लो था। वह अपने बच्चों के साथ बहुत खुश रहती थी। वह रोज जंगल में घास चरने जाया करती थी और शाम को वापस आ जाया करती थी।  

बकरी बहुत समझदार थी वह जंगल के खतरों से अवगत थी।  वह घास चरने के बाद जब घर वापस आती थी तो घर के दरवाजे पर अपने बच्चों का नाम बुलाती थी चेउ दरवाजा खोलो मेउ दरवाजा खोलो,अल्लो दरवाजो खोलो ,बल्लो दरवाजा खोलो। ...ऐसा वो रोज बुलाती थी तभी उसके बच्चे दरवाजा खोलते थे। वह समझ जाते थे की उसकी माँ आयी है। उसी जंगल में एक भेड़िया रहता था। 

वह बहुत चालक था। उसने एक बार बकरी को अपने बच्चों का नाम लेते हुये सुना। उसने उन बच्चों को खाने का प्रोग्राम बनाया। बकरी के जाने के कुछ ही देर बाद भेड़िया घर के दरवाजे पर आ के बकरी की आवाज में बोला.... चेउ दरवाजा खोलो,मेउ दरवाजा खोलो,अल्लो दरवाजा खोलो,बल्लो दरवाजा खोलो....... बच्चों ने सोचा की माँ आ गयी है उन्होंने दरवाजा खोल दिया। ...दरवाजा खुलते ही भेड़िया बच्चों पर झपट पड़ा और सरे बच्चों को खा गया। जब रात में बकरी वापस घर आयी तो उसने अपने बच्चों को बुलाया। ...... चेउ दरवाजा खोलो, मेउ दरवाजा खोलो ,अल्लो दरवाजा खोलो, बल्लो दरवाजा खोलो, ......... वह काफी देर तक बुलाती रही लेकिन बच्चों ने दरवाजा नहीं खोला। अंदर भेड़िया सब सुन रहा था वह अंदर ही था। बकरी समझ गयी की भेड़िये ने उसके बच्चों को खा गया है। वह भी बहुत समझदार थी.... उसने दरवाजा बाहर से बंद कर दिया जिससे भेड़िया घर से भाग न जाये और वह गाँव गयी 

भारत का पाषाण काल

पुरा पाषाण काल
मध्य पाषाण काल
नव पाषाण काल
 पुरा पाषाण काल ⇒ इसे तीन भागों में बांटा गया है. 
निम्न पुरा पाषाण काल 
 मध्य पुरा पाषाण काल 
 निम्न पुरा पाषाण काल 1 निम्न पुरा पाषाण काल इस काल का प्राणी मानव सदृश दिखता था। इसके जीवाश्म नर्मदा नदी खाड़ी के हथनौरा नामक स्थान पर में मिले है जिसके कारण इसे नर्मदा मानव भी कहते हैं। ये लोग कोर उपकरण प्रयोग करते थे। ये लोग chopper-chopping उपकरण भी प्रयोग करते थे इसीलिए इसे chopper- chopping culture कहते है। ये ice age था। 2 मध्य पुरा पाषाण काल इस काल का मानव निएंडरथल मानव कहलाता है। इसका काल १ लाख से लेकर ४० हज़ार वर्ष तक माना जाता है। इस काल में औजार शल्कों पर बनाये जाते थे। फलकों की अधिकता के कारण इस काल फलक संस्कृति भी कहते है। इस काल के औजार अधिकतर मध्य भारत , दक्कन , राजस्थान , महाराष्ट्र , तमिलनायडु , कर्नाटक , उड़ीसा में पाए गए है। 3 उच्च पुरा पाषाण काल इस काल का मानव होमो सेपियंस कहलाता है। इस काल का मानव पेंटिंग्स करने लगा था जिसका उदाहरण मध्य प्रदेश की भीमबेटका नामक गुफा से मिलता है। इलाहाबाद के लोहदानाला से हड्डी से बनी मातृदेवी की मूर्ति प्राप्त हुईं है। इस काल की सबसे बड़ी खोज आग की थी जिससे इनके जीवन में बहुत सुधार हुआ।ये लोग गुफाओं में रहते थे और मनोरंजन के लिए मल्लयुध्य किया करते थे। ये लोग चकमक पत्थर के हथियारों का प्रयोग करते थे।