दोस्तों, बहुत समय पहले की बात है। एक घने जंगल में एक बकरी रहती थी। उसके चार बच्चे थे। एक का नाम चेउ दूसरे का नाम मेउ तीसरे का अल्लो और चौथे का नाम बल्लो था। वह अपने बच्चों के साथ बहुत खुश रहती थी। वह रोज जंगल में घास चरने जाया करती थी और शाम को वापस आ जाया करती थी।
बकरी बहुत समझदार थी वह जंगल के खतरों से अवगत थी। वह घास चरने के बाद जब घर वापस आती थी तो घर के दरवाजे पर अपने बच्चों का नाम बुलाती थी चेउ दरवाजा खोलो मेउ दरवाजा खोलो,अल्लो दरवाजो खोलो ,बल्लो दरवाजा खोलो। ...ऐसा वो रोज बुलाती थी तभी उसके बच्चे दरवाजा खोलते थे। वह समझ जाते थे की उसकी माँ आयी है। उसी जंगल में एक भेड़िया रहता था।
वह बहुत चालक था। उसने एक बार बकरी को अपने बच्चों का नाम लेते हुये सुना। उसने उन बच्चों को खाने का प्रोग्राम बनाया। बकरी के जाने के कुछ ही देर बाद भेड़िया घर के दरवाजे पर आ के बकरी की आवाज में बोला.... चेउ दरवाजा खोलो,मेउ दरवाजा खोलो,अल्लो दरवाजा खोलो,बल्लो दरवाजा खोलो....... बच्चों ने सोचा की माँ आ गयी है उन्होंने दरवाजा खोल दिया। ...दरवाजा खुलते ही भेड़िया बच्चों पर झपट पड़ा और सरे बच्चों को खा गया। जब रात में बकरी वापस घर आयी तो उसने अपने बच्चों को बुलाया। ...... चेउ दरवाजा खोलो, मेउ दरवाजा खोलो ,अल्लो दरवाजा खोलो, बल्लो दरवाजा खोलो, ......... वह काफी देर तक बुलाती रही लेकिन बच्चों ने दरवाजा नहीं खोला। अंदर भेड़िया सब सुन रहा था वह अंदर ही था। बकरी समझ गयी की भेड़िये ने उसके बच्चों को खा गया है। वह भी बहुत समझदार थी.... उसने दरवाजा बाहर से बंद कर दिया जिससे भेड़िया घर से भाग न जाये और वह गाँव गयी